अंतरप्रांतीय गिरोह का 50 हजार का इनामी बदमाश पवन गांधी गिरफ्तार..............
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सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बंधक बनाकर लूटपाट करने वाले अंतरप्रांतीय गिरोह के 50 हजार के इनामी बदमाश को एसटीएफ ने पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना नार्थ से गिरफ्तार किया है। इनामी बदमाश की शिनाख्त कोलकाता निवासी पवन गांधी के तौर पर हुई है।आरोप है कि गुजरात निवासी तीन लोगों को बनारस बुलाकर विदेश भेजने के नाम पर उन्हें बंधक बनाकर 20 लाख रुपये की लूटपाट की गई थी।

उसके पास से सात मोबाइल, एक पासपोर्ट, तीन पैनकार्ड, आधार कार्ड, एटीएम और चेक बुक बरामद कर अदालत की अनुमति से उसे शहर लाया जा रहा है। पवन सहित अब तक इस गिरोह के सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है

सोशल मीडिया पर अमेरिका, कनाडा सहित अन्य देशों में अच्छी नौकरी दिलाने झांसा देकर रुपये हड़पने वाला एक गिरोह आजमगढ़ निवासी राजवीर सिंह यादव का है। यह गिरोह खासतौर से नेपाल, बांग्लादेश और गुजरात के लोगों को अमेरिका, कनाडा आदि देशों में अच्छी सैलरी पर नौकरी लगवाने का झांसा देता है।

शर्त यह रहती है कि नौकरी मिलने के बाद हवाला के माध्यम से 15 से 20 लाख रुपये देने होंगे। नौकरी लगने के बाद पैसा देने की बात पर इच्छुक लोग आसानी से विश्वास कर लेते हैं और सोशल मीडिया पर दिए गए नंबर की मदद से गिरोह के सदस्यों से संपर्क करते हैं। फिर, दो से तीन दिन बाद संबंधित देश का वर्चुअल नंबर इंटरनेट से तैयार कर दोबारा परिजन से बात कराई जाती थी कि हम विदेश पहुंच कर नौकरी कर रहे हैं।

कैंट थाने में तीन दिसंबर 2019 को दर्ज एक ऐसे ही मामले में पवन गांधी की पुलिस को तलाश थी। आरोप है कि गुजरात निवासी तीन लोगों को बनारस बुलाकर विदेश भेजने के नाम पर उन्हें बंधक बनाकर 20 लाख रुपये की लूटपाट की गई थी। इसके बाद आंख में पट्टी बांध कर नई दिल्ली का टिकट थमाकर उन्हें कैंट रेलवे स्टेशन के समीप छोड़ दिया गया था।

गिरोह कैसे करता था बंधक बनाकर लूटपाट..
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के डीएसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही लोग सोशल मीडिया के माध्यम से गिरोह के झांसे में आकर विदेश में नौकरी करने के लिए तैयार हो जाते थे, उन्हें बनारस बुलाया जाता था। विदेश में नौकरी करने के इच्छुक को पवन और उसका साथी राहुल मेहरा सिगरा और सारनाथ स्थित अपने ठिकाने पर ले जाते थे और बंधक बना लेते थे।

इसके बाद उनके परिजन से बात करा कर कहवाते थे कि हम बाबतपुर एयरपोर्ट से यात्रा पर निकल रहे हैं। फिर, दो से तीन दिन बाद संबंधित देश का वर्चुअल नंबर इंटरनेट से तैयार कर दोबारा परिजन से बात कराई जाती थी कि हम विदेश पहुंच कर नौकरी कर रहे हैं। मौसम खराब होने की वजह से वीडियो कॉल नहीं कर पा रहे हैं। नौकरी दिलाने वालों को जो पैसा देने की बात तय हुई थी वह अब दे दिया जाए।

परिजन अपने घर के युवक की बात पर विश्वास कर पवन को पैसा दे देते थे। पैसा मिलते ही विदेश में नौकरी करने के इच्छुक युवक की आंख में पट्टी बांध कर उसे कैंट रेलवे स्टेशन के समीप छोड़ दिया जाता था। इस मामले के अन्य छह आरोपियों को गिरफ्तार कर पवन की सुरागकशी शुरू की गई तो पता लगा कि वह चौबीस परगना नार्थ के राजरहाट में छुपा हुआ है।

सूचना की पुष्टि कर एसटीएफ की वाराणसी इकाई के निरीक्षक अनिल कुमार सिंह ने अरविंद पाठक, सलीमुद्दीन, अनिरुद्ध सुवन त्रिपाठी, अजय जायसवाल और राजमणि की टीम के साथ छापा मार कर पवन को गिरफ्तार कर लिया। अब प्रकरण में वांछित राहुल मेहरा की तलाश की जा रही है।

40 लोगों को बंधक बनाकर की लूटपाट..
गिरफ्तार पवन ने बताया कि अब तक उसके गिरोह ने विदेश में नौकरी के इच्छुक 40 लोगों को बंधक बनाकर बनारस में लूटपाट की है। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर उसके गिरोह की गहरी पैठ है।

विदेश में नौकरी के विज्ञापन के लिए जो मोबाइल नंबर दिया जाता था वह फर्जी नाम और पते पर लिया जाता था। ऐसे प्रत्येक युवक से कम से कम 14 लाख और अधिकतम 20 लाख रुपये वसूला गया था। पैसे को गिरोह के साथी आपस में बांट लेते थे। पैसा मिलते ही विदेश में नौकरी करने के इच्छुक युवक की आंख में पट्टी बांध कर उसे कैंट रेलवे स्टेशन के समीप छोड़ दिया जाता था।

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