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रिपोर्ट रामजीत

आजमगढ़ : करवा चौथ को लेकर हर सुहागिन पत्नी पति की लम्बी उम्र के लिए पुजा व्रत रखती है ताकि उनका सुहाग अमर रहे। इसके लिए वह कोई कसर नहीं छोड़तीं और परंपरा के अनुसार सारी तैयारी करती हैं। महिलाओं को तीज और करवाचौथ का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस बार करवाचौथ का व्रत बुधवार होगा। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं और शाम को चांद को अ‌र्घ्य अर्पित करने के बाद चलनी से पति का दीदार कर उनके हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ेंगी। इस दिन चतुर्थी माता और गणेशजी की भी पूजा की जाती है। एक किवदंति के अनुसार जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज आए तो पतिव्रता सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सुहाग को न ले जाने के लिए निवेदन किया। यमराज के न मानने पर सावित्री ने अन्न-जल का त्याग दिया। वो अपने पति के शरीर के पास विलाप करने लगीं। पतिव्रता स्त्री के इस विलाप से यमराज विचलित हो गए, उन्होंने सावित्री से कहा कि अपने पति सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त कोई और वर मांग लो।सावित्री ने यमराज से कहा कि आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिसे यमराज ने हां कह दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज लेकर नहीं जा सके और सत्यवान के जीवन को सावित्री को सौंप दिया। कहा जाता है कि तब से स्त्रियां अन्न-जल का त्यागकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखती हैं।
​व्रत की तैयारी को लेकर बाजारों में रोज की अपेक्षा मंगलवार को कुछ ज्यादा ही भीड़ उमड़ी रही। अंतिम दौर में करवा और कुश के साथ अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी के बाद महिलाओं ने मेहंदी रचाई। व्रत से करवा और कुश का क्या संबंध है, यह तो कोई नहीं बता पाता लेकिन यही एक व्रत है जिसमें करवा और कुश का प्रयोग किया जाता है। करवा में तरह-तरह के पकवान रखकर भगवान को अर्पित किया जाता है। उसके बाद महिलाएं व्रत से जुड़ी कथा का श्रवण करती हैं।

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