भारत//लएसी पर तनातनी वाले इलाके से पूर्व में बनी सहमति के आधार पर शीघ्र ही पूरी सेना हटाना ही बेहतर...................p14news
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भारत / ने एक बार फिर चीन को दो टूक कहा है कि एलएसी पर तनातनी वाले इलाके से पूर्व में बनी सहमति के आधार पर शीघ्र ही पूरी सेना हटाना ही बेहतर होगा। शुक्रवार को चीन में भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री ने चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग के अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग निदेशक मेजर जनरल सी गुओवेई से मुलाकात कर भारत का रुख स्पष्ट किया। वहीं, देर शाम भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि चीन गंभीरता दिखाएगा और एलएसी पर शांति बहाली में सहयोग करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, द्विपक्षीय संबंधों के लिए शीघ्र और पूरी सेना को हटाना और एलएसी पर शांति बहाल करना बेहद जरूरी है। विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा था कि सीमा के हालात और दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। श्रीवास्तव ने कहा, सेना पीछे हटाने की दिशा में प्रगति हुई है लेकिन यह भी सच है कि दोनों देशों के बीच बनी सहमति लागू करना बड़ी चुनौती है।

इसके लिए जरूरी है कि दोनों देश अपने-अपने सैनिकों की पहले की स्थिति मेें तैनाती सुनिश्चित करें। यह परस्पर सहयोग से ही संभव है। भारत जल्द से जल्द सेना की वापसी चाहता है और चीन से उम्मीद करता है कि वह गंभीरता के साथ सैनिकों को पीछे हटाए।

फिंगर चार से आठ तक हटानी होगी सेना…
इससे पहले बीजिंग में स्थित भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, विक्रम मिस्री ने गुओवेई को एलएसी पर मौजूदा हालात को लेकर भारत का रुख स्पष्ट कर दिया। उन्हें बता दिया कि चीन को फिंगर चार से फिंगर आठ तक सेना पीछे हटानी होगी। विक्रम की तीन दिनों में चीनी अधिकारियों के साथ दूसरी मुलाकात है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच दो घंटे हुई बातचीत में बनी सहमति के ठीक एक दिन बाद दोनों देशों के बीच सेना पीछे हटाने की प्रक्रिया 6 जुलाई को शुरू हुई थी। तब से चीन ने गलवां घाटी और कुछ अन्य तनातनी वाले इलाकों से सैनिक हटाए हैं। हालंाकि चीन ने भारत की मांग के बावजूद पैंगोंग सो, गोगरा और डेपसांग से अभी भी सैनिक नहीं हटाए हैं।

दोनों देशों विश्वास कायम करने की जरूरत:- विडोंग…
भारत में चीनी राजदूत सू विडोंग ने कहा, सीमा पर तनाव खत्म करने के लिए दोनों देशों को विश्वास कायम करना होगा। हमारे बीच में संदेह की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम भारत से अपील करते हैं कि एलएसी पर तनाव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करें।

अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों को ऐसी कार्रवाई से बचने के निर्देश दें। विडोंग की यह टिप्पणी चीनी दूतावास द्वारा प्रकाशित मैगजीन ‘चाइना इंडिया रीव्यू’ में छपी है। उन्होंने कहा, उतार चढ़ाव आते हैं और हमें पिछली बातों पर ध्यान देने के बजाय आगे बढ़ना होगा।

हमें हमारे राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच रिश्तों को मजबूत बनाने पर बनी सहमति पर जोर देना चाहिए। हमें तनाव खत्म कर शांति बहाल करने की ओर बढ़ना चाहिए।तब से चीन ने गलवां घाटी और कुछ अन्य तनातनी वाले इलाकों से सैनिक हटाए हैं।

विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा था कि सीमा के हालात और दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। श्रीवास्तव ने कहा, सेना पीछे हटाने की दिशा में प्रगति हुई है लेकिन यह भी सच है

 

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