'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।भाई -बहन के अटूट प्रम ,सामाजिक एवं पारिवारिक एकसूत्रता पारस्परिक असीम स्नेह और विश्वास के प्रतीक पवित्र पर्व रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आपको तोटिशः हार्दिक p14news शुभकामनाएं
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रक्षासूत्र का मंत्र है-
भाई -बहन के अटूट प्रम ,सामाजिक एवं पारिवारिक एकसूत्रता पारस्परिक असीम स्नेह और विश्वास के प्रतीक पवित्र पर्व रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आपको तोटिशः हार्दिक p14news शुभकामनाएं

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‘येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।भाई -बहन के अटूट प्रम ,सामाजिक एवं पारिवारिक एकसूत्रता पारस्परिक असीम स्नेह और विश्वास के प्रतीक पवित्र पर्व रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आपको तोटिशः हार्दिक p14news शुभकामनाएं

इस मंत्र का सामान्यत: यह अर्थ लिया जाता है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे!(रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो।
धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षा सूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहत अपने यजमान को कहता है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात् धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, यानी धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। इसके बाद पुरोहित रक्षा सूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना। इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है।

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:। p14news

शास्त्रों में कहा गया है – इस दिन अपरान्ह में रक्षासूत्र का पूजन करे और उसके उपरांत रक्षाबंधन का विधान है। यह रक्षाबंधन राजा को पुरोहित द्वारा यजमान के ब्राह्मण द्वारा, दाहिनी कलाई पर किया जाता है।

संस्कृत की उक्ति के अनुसार——————————————————————-

जनेन विधिना यस्तु रक्षाबंधनमाचरेत। स सर्वदोष रहित, सुखी संवतसरे भवेत्।।

अर्थात् इस प्रकार विधिपूर्वक जिसके रक्षाबंधन किया जाता है वह संपूर्ण दोषों से दूर रहकर संपूर्ण वर्ष सुखी रहता है।
रक्षाबंधन में मूलत: दो भावनाएं काम करती रही हैं। प्रथम जिस व्यक्ति के रक्षाबंधन किया जाता है उसकी कल्याण कामना और दूसरे रक्षाबंधन करने वाले के प्रति स्नेह भावना। इस प्रकार रक्षाबंधन वास्तव में स्नेह, शांति और रक्षा का बंधन है। इसमें सबके सुख और कल्याण की भावना निहित है।
सूत्र का अर्थ धागा भी होता है और सिद्धांत या मंत्र भी। पुराणों में देवताओं या ऋषियों द्वारा जिस रक्षासूत्र बांधने की बात की गई हैं वह धागे की बजाय कोई मंत्र या गुप्त सूत्र भी हो सकता है। धागा केवल उसका प्रतीक है।

रक्षासूत्र बाँधते समय एक श्लोक और पढ़ा जाता है जो इस प्रकार है———————————–

ओम यदाबध्नन्दाक्षायणा हिरण्यं, शतानीकाय सुमनस्यमाना:।

तन्मSआबध्नामि शतशारदाय, आयुष्मांजरदृष्टिर्यथासम्।।

मेरे एवं मेरे परिवार की तरफ से आपको एवं आपके परिवार को इस शुभ अवसर पर रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं

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